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कृषकों की दृष्टि से
मिट्टी की दृष्टि से
पर्यावरण की दृष्टि से

हमारी कार्य प्रणाली एवं उपयोगिता

जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है।

भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं। भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होगा।

रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है। फसलों की उत्पादकता में वृद्धि।

भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है। सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है।

भूमि के जल स्तर में वृद्धि होती है। मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण मे कमी आती है।

Features

बायोसिल अमृत

इसके प्रयोग से अनाज, बगीचों, फूल, सब्जियों इत्यादि में फूल, फल रंग एवं चमक प्रदान करता हैं

अमृतजल

इसके उपयोग से जड़ो की सड़न, गलन तथा फफूंदी रोग को रोकता है एवं पोधो के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है

बायोसील अमृत वर्षा

मृदा के बांझपन को समाप्त कर मिटटी में केचुओं ओर राइ जैवियम बैक्टेरिया को सक्रीय करता है

कैटर कट

जिसके उपयोग से फसलों पर होने वाले कीट पतंगों इल्ली , वाईट , फ्लाई , रेड माइल , थ्रिप्स जैसे खतरनाक रोगो के नियंत्रण में अत्यंत प्रभावकारी है

पंचगव्य

यह एक अत्यधिक प्रभावी जैविक खाध है जो पौधों की वृद्धि एवं विकास में सहायता करता है और उनकी प्रतिरक्षा सहमत को बढ़ता है|

केंचुआ खाद

इसके प्रयोग से मिटटी की कठोरता का नाश होता है तथा मिटटी को भुरभुरी बनता है

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